भगवत्पाद शङ्कराचार्य
“अम्बा! सन्यासी भवामी” यह वाक्य जिनकी
जिह्वा पर बाल्यकाल से ही स्थित रहा हो वो
कोई सामान्य भारत का बालक नहीं था अपितु
विश्व में अद्वैत वेदान्त ज्ञान द्वारा आत्मोद्धार का
चिन्तन चिरन्तन प्रशस्त करने वाले भारतीय ज्ञान
परम्परा के आदर्शभूत भगवत्पाद जगद्गुरु शङ्कराचार्य
से आखिर आज कौन अपरिचित है? जिनके विषय
में कहा जाता है-
षोडशे कृतवान् भाष्यं द्वात्रिंशे मुनिरभ्यगात्”।।
आप
केरल प्रदेश के कलादी नामक गाँव में एक वेदशास्त्रपारङ्गत धर्मनिष्ठ ब्राह्मण के
घर में प्रादुर्भूत हुए। बचपन से ही ईश्वरीय का दर्शन आप में होता रहा। जिस समय
सम्पूर्ण भारत स्वस्वरूप से च्युत हो रहा था आपने उस समय अवतीर्ण होकर येन-केन
प्रकारेण समाज में स्थित सम्पूर्ण अन्धकार का विनाश करके ज्ञान दीप शिखा का निश्छल
आलोक प्रदान किया। आप साक्षात् देवाधिदेव महादेव के अवतार माने जाते हैं। आपके
जीवन की अलौकिकता को देखते हुए इस बात में कोई सन्देह भी नहीं रह जाता है। आप एक
वर्ष की उम्र में ही अपनी मातृभाषा में बातचीत करने लगे, दो वर्ष की आयु में ही
माताद्वारा कथित पुराण-कथाओं को कण्ठस्थ करने लगे।
तत्पश्चात् काशी में अपने विरोधियों को हराकर आपने सारे भारत का भ्रमण किया और सर्वत्र सनातनधर्मका प्रचारकर चारों दिशाओं में चार विभिन्न मठ स्थापित करके अपने चार प्रधान शिष्यों को धर्म प्रचार के लिये जगद्गुरु के पदपर बैठाया।
आपने ब्रह्मसूत्र, दशोपनिषद् तथा गीता पर अपूर्व भाष्य लिखे तथा अन्य कितने ही ग्रन्थ और स्तोत्र रचे, जिनसे आज भी मनुष्यजातिका महान् कल्याण हो रहा है। योग विधा के आप एक सिद्ध साधक थे। परकायप्रवेश, भविष्यकी बात जान लेना आदि कितनी ही योगसम्बन्धी सिद्धियाँ भी आप में देखी गयीं। आपकी भगवद्भक्ति तो अपूर्व थी ही, जिसका प्रमाण आपके स्तोत्र दे रहे हैं। आपने अपनी भक्ति के बलरपर एक दरिद्र ब्राह्मणको धन-जन सम्पन्न किया था। अपनी वृद्धा माता को उनकी इच्छा के अनुरूप विष्णुलोक की प्राप्ति करायी थी। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में आपकी दी हुई ज्ञान राशि आज करोडोँ जन-मानस का कल्याण प्रशस्त कर रही हैं। आज के युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानन्द जी के भी जो आदर्श रहे हों वस्तुतः वो हम सभी के आदर्शभूत अपनी दिव्यतम कृतियों तथा स्वशिष्यों पर अद्भुत अनुग्रहता के कारण आज भी अपना आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं। ऐसे महापुरुषों का आगमन मानव जगत् के कल्याणार्थ ईश्वर अंश रुप में होता रहता है।
.png)





कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें